Aims & Objectives | Welcome to Nagar Palika Parishad Baghpat

Aims & Objectives

धारा-7 के अन्तर्गत नगर पालिका के कर्तव्यः-

  1. सार्वजनिक सड़को और स्थानो पर रोशनी,
  2. सार्वजनिक सड़को और स्थानो पर पानी,
  3. नगर पालिका की सीमा का सर्वेक्षण करना और सीमा चिन्ह लगाना,
  4. सार्वजनिक सड़को,स्थानो और नालियो की सफाई करना,हानिकार वनस्पति को हटाना ओैर समस्त लोक न्यूसेंस का उपशमन करना,
  5. संतापकारी,खतरनाक या आपत्तिजनक,व्यापार,आजीविका या प्रथा का विनियमन करना।
  6. अवारा कुत्तो तथा खतरनाक पशुओ को परिरूद्व करना,हटाना या नष्ट करना।
  7. लोक सुरक्षा,स्वास्थ्य या सुविधा के आधार पर सड़को य सार्वजनिक स्थानो में अवांछनीय अवरोध और प्रक्षेप हटाना।
  8. खतरनाक भावनो और स्थानो को सुरक्षित बनाना या हटाना।
  9. मृतको के निस्तारण के लिये स्थान अर्जित,अनुरक्षित,परिवर्तित और विनियमित करना और अदावाकृत शवो के पुलिस से लिखित रूप में यह अभिनिश्चित करने के पश्चात् कि ऐसा करनें मे ंकोई आपत्ति नही ह,ै निस्तारण का प्रबन्ध करना।
  10. सार्वजनिक सड़को, पुलियों,बाजारो,बध-शालाओ ,शौचालयो,संडासो,मूत्रालयो,नालियो जलोत्सारण निर्माण कार्याे तथा सीवर व्यवस्था सम्बन्धी निर्माण कार्याे का निर्माण,परिवर्तन और अनुरक्षण करना।
  11. घरेलू,औद्योगिक,और वाणिज्यिक प्रयोजनो के लिये जलापूर्ति उपलब्ध कराना।
  12. सड़क के किनारे तथा अन्य सार्वजनिक स्थानो में वृक्ष लगाना और उनका अनुरक्षण करना।
  13. ऐसे स्थानो में जहाॅ वर्तमान जल संभरण के अपर्याप्त या अस्वास्थ्यप्रद होने से वहाॅ के निवासियो के स्वास्थ्य को संकट हो,शुद्ध और स्वास्थ्यप्रद जल के पर्याप्त संभरण की व्यवस्था करना,मनुष्यो के उपभोग के लिये प्रयुक्त होने वाले जल को प्रदूषित होने से बचाना और प्रदूषित जल के ऐसे उपयोग को रोकना।
  14. जल संभरण के अन्य किसी स्त्रोत के अतिरिक्त,सार्वजनिक कुओ को यदि कोई हो,ठीक हालत में रखना,उनके जल को प्रदूषित होने से बचाना और उसे मनुष्यो के उपयोग के योग्य बनाये रखना।
  15. जन्म और मरण का रजिस्ट्रीकरण।
  16. सार्वजनिक टीका लगाने की प्रणाली की स्थापना तथा उनका अनुरक्षण।
  17. सार्वजनिक चिकित्सालयो और ओैषधालयो की स्थापना उनका अनुरक्षण या उनकी सहायता करना और सार्वजनिक चिकित्सा सम्बन्धी सहायता की व्यवस्था करना।
  18. प्रसूति,केन्द्रो,शिशु कल्याण और जन्म नियन्त्रण क्लीनिको की स्थापना,अनुरक्षण और सहायता,करना और जनसंख्या नियन्त्रण,परिवार कल्याण गैर छोटे परिवार के मानक का संवर्द्धन करना।
  19. पशु चिकित्सालयो की अनुरक्षण करना या अनुरक्षण हेतु उन्हे सहायता प्रदान करना।
  20. शारीरिक संवर्धन की संस्थानो की स्थापना और उनका अनुरक्षण या उन्हें सहायता प्रदान करना।
  21. प्राथमिक विद्यालयो की स्थापना और उनका अनुरक्षण करना।
  22. आग बुझाने में सहायता देना और आग लगने पर जीवन तथा सम्पत्ति की रक्षा करना।
  23. नगर पालिका में निहित या उसके प्रबन्ध में सौपी गयी सम्पत्ति की सुरक्षा करना,उसका अनुरक्षण तथा विकास करना।
  24. नगर पालिका की वित्त-व्यवस्था को संतोषप्रद स्थिति बनाये रखने और उनके दायित्वो को पूरा करना।
  25. शासकीय पत्रो पर तत्काल ध्यान देना और ऐसी विवरणियो,विवरण और रिपोर्ट तैयार करना,जिन्हे राज्य सरकार नगर पालिका से प्रस्तुत करने की अपेक्षा करें और
  26. विधि द्वारा उस पर अधिरोपित किसी बाध्यता की पूर्ति करना।
  27. चर्मशोधन शालाओ को विनियमित करना।
  28. पार्किग स्थल,बस स्टाप और जन सुविधाओ का निर्माण और अनुरक्षण करना।
  29. नगरीय वानिकी और परिस्थिति की पहलुओ की अभिवृद्धि और पर्यावरण का संरक्षण करना।
  30. समाज के दुर्बल वर्गो के,जिनके अन्तर्गत विकलांग और मानसिक रूप से मन्द व्यक्ति है,हितो का सरक्षण करना।
  31. सास्ंकृतिक,शौक्षणिक और सौदर्यपरक पहलुओ की अभिवृद्धि करना।
  32. कांजी हाउस का निर्माण और अनुरक्षण करना और पशुओ के प्रति क्रूरता का निवारण करना।
  33. गन्दी-बस्ती सुधार और उन्नयन।
  34. नगरीय निर्धनता कम करना और
  35. नगरीय सुख- सुविधाओ और सुुविधाओ,जैसे की पार्क ,उद्यान और खेल के मैदानो की व्यवस्था करना।

नगर पालिका के वैवेकिक कृत्यः-

  1. नगर पालिका की सीमाओ के भीतर और विहित प्राधिकारी की स्वीकृति से ऐसी सीमाओ के बाहर ,निम्नलिखित के लिये व्यवस्था कर सकता है।
  2. उन क्षेत्रो में जिनमें चाहे पहले के निर्माण किया गया हो या नही नवीन सार्वजनिक सड़को का विन्यास और इस प्रयोजन के लिये तथा भवनो और उनके अहातो के निर्माण के लिये जो ऐसी सड़को से संसक्त हो भूमि अर्जित करना।
  3. मास्टर प्लान तैयार करना और उसे निष्पादित करना।
  4. पुस्तकालय,संग्रहालय,वाचनालय,रेडियो संग्राहो केन्द्र कुष्ठाश्रम,अनाथालय,शिशु -सदन और महिला उद्धार-गृह,पागलखाना हाल,कार्यालय,धर्मशाला,विश्राम,गृह ,दुग्धशाला,स्नानागार,स्नानघाट,धोबियो के धुलाई-स्थल,पीने के पानी का स्त्रोत (डिकिंग फाउन्टेन) ,तालाब,कुआॅ,बाॅध, तथा अन्य लोकोपयोगी निर्माण कार्यो का निर्माण,उनकी स्थापना तथा उनका अनुरक्षण में अंशदान देना।
  5. प्राथमिक स्कूलो की स्थापना और उनके अनुरक्षण से भिन्न उपायो द्वारा शैक्षिक उद्देश्यो का प्रसार करना।
  6. जनगणना करना और ऐसी सूचना के लिये इनाम देना,जिससे जन्म -मरण के आॅकडो का सही रजिस्ट्रीकरण सुनिश्चित हो सकें।
  7. ऐसी सूचना के लिये इनाम देना जिससे इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित कर के अपवर्चन का,या नगर पालिका में निहित या उसके प्रबन्ध या नियन्त्रण में सौपी गई सम्पत्ति को हानि पहुॅचाने या उस पर अधिक्र्रमण करने का पता लगे।
  8. स्थानीय विपत्ति पड़ने पर सहायता कार्यो की स्थापना और उनका अनुरक्षण करके या अन्य प्रकार से सहायता करना।
  9. धारा 298 के शीर्षक 'छ' के उपशीर्षक(क) के अधीन उल्लिखित किसी व्यापार या निर्माण के कार्यान्वयन के लिये उपयुक्त स्थान प्राप्त करना या प्राप्त करने में सहायता देना।
  10. स्ीवेज के निस्तारण के लिये फार्म या कारखाना स्थापित करना और उसका अनुरक्षण करना।
  11. विष्ठा और कूड़ा करकट से कम्पोस्ट खाद तैयार करने के लिये प्रबन्ध करना।
  12. ट्राम मार्ग,रेल पथ या संचालन के अन्य साधनो और बिजली या गैस की रोशनी या विद्युत या गैस के शक्ति संक्रम का निर्माण करना,उन्हे सहायता देना या उनको प्रत्याभूति देना।
  13. पर्यटक यातायात की अभिवृद्धि करना।
  14. मेेले और प्रदर्शनियाॅ करना।
  15. गृह और नगर नियोजन योजनाएॅ तैयार करना उनका निष्पादन।
  16. व्यापार और उद्योग की अभिवृद्धि के लिये उपाय करना।
  17. दुग्ध संभरण।
  18. अपने कर्मचारियो के लिये श्रम कल्याण केन्द्र स्थापित करना और ऐसे कर्मचारियो के किसी एसोसियेशन संघ या क्लब की सामान्य उन्नति कि लिये अनुदान अथवा ऋण देकर उसके कार्यकलापो में सहायता देना।
  19. नगरपालिका संघों में का संगठित करना उन्हे अंशुदान देना।
  20. धारा 7 में या इस धारा के पूर्वगामी उपबन्धो में विनिर्दिष्ट उपायो से भिन्न ऐसे उपाय करना,जिनसे लोक सुरक्षा ,स्वास्थ्य या सुविधा में अभिवृद्धि होने की संभावना हो और
  21. अनुसूचित जातियोे तथा पिछड़े वर्गो की सामाजिक निर्योग्यताओ की ऐसी रीति से दूर कराना,जो विहित की जाएॅ।
  22. भिक्षा-वृत्ति पर नियन्त्रण के लिये उपाय करना।
  23. कोई ऐसा कार्य करना,जिसके सम्बन्ध में व्यय राज्य सरकार द्वारा या नगर पालिका द्वारा विहित प्राधिकारी की स्वीकृति से,नगर पालिका निधि पर समुचित प्रभार घोषित किया जायें।

उपरोक्त कर्तव्यो को पूरा करने के लिये नगर पालिका परिषद बागपत अधिनियम की धारा-128 के अन्तर्गत निम्नलिखित कर लगा सकती है।

  1. भवनो या भूमि या दोनो के वार्षिक मूल्य पर कर।
  2. भवनो या भूमि या दोनो के वार्षिक मल्प पर जलकर।
  3. भवनो के वार्षिक मूल्य पर जल निकास कर,जो ऐसे भवन पर उद्ग्रहणीय हो,जो निकटतम सीवर लाइन से प्रत्येक नगर पालिका के लिये इस निमित नियमो द्वारा निर्धारित की जाने वाली दूरी के भीतर स्थित हो।
  4. शौचलायो,मूत्रोलयो और मलकुंडो से मलजनित और प्रदूषित पदार्थो का संग्रहरण करने,हटाने और निस्तार करने के लिये सफाई कर।
  5. उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट करों के अतिरिक्त नगर पालिका,इस अधिनियम के प्रयोजनो के लिये और उनके उपलब्धो के अधीन रहते हुये,निम्नलिखित में से कोई कर अधिरोपित कर सकती है,अर्थात ।
  6. ऐसे व्यापार और आजीविका पर कर,जो नगर पालिका की सीमाओ के भीतर किये जाते हो , और जिन्हे नगर पालिका सेवाओ से विशेष लाभ हो रहा हो,या जिनसे उक्त सेवाओ पर विशेष भार पड़ सकता हो।
  7. ऐसे व्यापार,आजीविका और व्यवसाय पर कर ,जिनमें ऐसे सभी सेवायोजन भी सम्मिलित है,जो वेतन या फीस के रूप में पारिश्रमिक दिया जाता है।
  8. नाट्यशाला कर,जिसका तात्पर्य विनोद या आमोद का कर है।
  9. नगर पालिका के भीतर रखे गये कुत्तो पर कर,
  10. सफाई कर।
  11. नगर पालिका की सीमाओ के भीतर स्थित स्थावर सम्पत्तियो के अन्तरण विलेखो पर कर।
  12. विज्ञापनो पर कर,जो समाचार पत्रो में प्रकाशित न हों।
  13. नगर पालिका की सीमा के भीतर चलाये जाने वाले यानो और अन्य वाहनो या उसकी सीमा में बन्धी जाने वाली नावो पर कर।
  14. सुधार कर।